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लिवर सिरोसिस: कारण, लक्षण, जांच और उपचार

लिवर सिरोसिस: कारण, लक्षण, जांच और उपचार

रमेश कुमार

लिवर सिरोसिस ( Liver Cirrhosis) मानव शरीर की एक गंभीर और धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है। लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है, जो शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह भोजन से प्राप्त पोषक तत्वों को उपयोगी ऊर्जा में बदलता है, खून को साफ करता है, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है, पित्त का निर्माण करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायता करता है। जब लिवर पर लंबे समय तक किसी कारण से चोट या सूजन बनी रहती है तो उसकी सामान्य कोशिकाएं धीरे-धीरे खराब होने लगती हैं और उनकी जगह कठोर रेशेदार ऊतक बनने लगते हैं। इस प्रक्रिया को फाइब्रोसिस कहा जाता है। जब यही फाइब्रोसिस बहुत अधिक बढ़ जाता है तो लिवर सिरोसिस की स्थिति पैदा होती है। सिरोसिस में लिवर की बनावट बदल जाती है और वह पहले की तरह ठीक से काम नहीं कर पाता। यह बीमारी अचानक नहीं होती बल्कि कई वर्षों के दौरान धीरे-धीरे विकसित होती है। शुरुआत में व्यक्ति को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती, इसलिए कई बार बीमारी का पता देर से चलता है। लेकिन जैसे-जैसे लिवर की क्षमता कम होती जाती है, शरीर में कई तरह की समस्याएं दिखाई देने लगती हैं। पेट में पानी भरना, शरीर में सूजन, पीलिया, कमजोरी, खून की उल्टी और मानसिक बदलाव जैसी समस्याएं गंभीर अवस्था का संकेत हो सकती हैं।
आज पूरी दुनिया में लिवर सिरोसिस स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। शराब का अधिक सेवन, वायरल हेपेटाइटिस, मोटापा, मधुमेह और गलत जीवनशैली इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। सही समय पर पहचान और उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

लिवर का महत्व

लिवर शरीर के लिए एक रासायनिक प्रयोगशाला की तरह काम करता है। हम जो भोजन खाते हैं, उससे मिलने वाले पोषक तत्वों को शरीर के उपयोग के योग्य बनाना लिवर का मुख्य कार्य है। यह ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में जमा करके जरूरत पड़ने पर ऊर्जा प्रदान करता है। लिवर प्रोटीन बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो शरीर के विकास और खून के जमने के लिए जरूरी होते हैं। इसके अलावा लिवर शरीर में बनने वाले जहरीले पदार्थों को निष्क्रिय करता है। शराब, दवाओं और अन्य रसायनों का प्रभाव कम करने में लिवर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लिवर पित्त का निर्माण करता है, जो वसा के पाचन में सहायता करता है। इसलिए जब लिवर खराब होता है तो शरीर के लगभग सभी हिस्सों पर इसका असर पड़ सकता है। सिरोसिस के कारण लिवर की ये सभी क्षमताएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। इससे शरीर में विषैले पदार्थ जमा हो सकते हैं और कई गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

मुख्य कारण

लिवर सिरोसिस के कई कारण हो सकते हैं। अलग-अलग लोगों में बीमारी का कारण अलग हो सकता है। कई बार एक से अधिक कारण मिलकर लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं।
शराब का अधिक सेवन सिरोसिस का एक प्रमुख कारण है। लगातार और अधिक मात्रा में शराब लेने से लिवर की कोशिकाओं में सूजन और नुकसान होने लगता है। शुरुआत में फैटी लिवर की समस्या होती है, लेकिन यदि शराब का सेवन जारी रहता है तो यह सूजन बढ़कर फाइब्रोसिस और फिर सिरोसिस में बदल सकती है। शराब से होने वाली लिवर बीमारी लंबे समय तक चलने वाली समस्या बन सकती है।
वायरल हेपेटाइटिस भी सिरोसिस का बड़ा कारण है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस लिवर में संक्रमण पैदा करते हैं। कई बार यह संक्रमण वर्षों तक शरीर में बना रहता है और धीरे-धीरे लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। समय पर जांच और इलाज से इन संक्रमणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
आजकल फैटी लिवर से जुड़ी बीमारी भी तेजी से बढ़ रही है। मोटापा, मधुमेह, ज्यादा वसा वाला भोजन और कम शारीरिक गतिविधि के कारण लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर लिवर में सूजन और नुकसान हो सकता है, जो आगे चलकर सिरोसिस का कारण बन सकता है।
कुछ लोगों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है। इसे ऑटोइम्यून लिवर रोग कहा जाता है। इसके अलावा पित्त की नलिकाओं में रुकावट, कुछ आनुवंशिक बीमारियां और लंबे समय तक कुछ दवाओं का गलत प्रभाव भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।

बीमारी का विकास

लिवर सिरोसिस बनने की प्रक्रिया काफी धीमी होती है। जब लिवर पर बार-बार चोट लगती है तो शरीर उसकी मरम्मत करने की कोशिश करता है। इस दौरान कुछ विशेष कोशिकाएं सक्रिय होकर रेशेदार ऊतक बनाने लगती हैं। शुरुआत में यह प्रक्रिया शरीर के लिए मददगार होती है, लेकिन लंबे समय तक चलने पर यही प्रक्रिया लिवर को नुकसान पहुंचाने लगती है। फाइब्रोसिस बढ़ने से लिवर की सामान्य संरचना बदल जाती है। खून का प्रवाह प्रभावित होने लगता है और लिवर के अंदर दबाव बढ़ जाता है। इसे पोर्टल हाइपरटेंशन कहते हैं। इसके कारण भोजन नली की नसें फूल सकती हैं और उनमें रक्तस्राव का खतरा पैदा हो सकता है। जब लिवर जहरीले पदार्थों को साफ नहीं कर पाता तो ये पदार्थ खून के माध्यम से दिमाग तक पहुंच सकते हैं। इससे व्यक्ति के व्यवहार, सोचने और याद रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसे हेपेटिक एन्सेफेलोपैथी कहा जाता है।

लक्षण

सिरोसिस के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य होते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। थकान, कमजोरी, भूख कम लगना, वजन कम होना और शरीर में ऊर्जा की कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर आंखों और त्वचा में पीलापन आने लगता है। इसका कारण शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाना होता है। पेट में पानी जमा होने से पेट फूल सकता है और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। पैरों में सूजन भी आम समस्या है। कुछ मरीजों में त्वचा पर छोटी-छोटी लाल नसों का जाल दिखाई देता है। हथेलियों का लाल होना भी लिवर की बीमारी का संकेत हो सकता है। मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और शरीर का वजन कम हो सकता है। गंभीर स्थिति में खून की उल्टी, काले रंग का मल, अत्यधिक नींद, भ्रम, व्यवहार में बदलाव और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

जांच

लिवर सिरोसिस की पहचान के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज की बीमारी का इतिहास और लक्षणों की जानकारी लेते हैं। इसके बाद शारीरिक जांच की जाती है। खून की जांच से लिवर की कार्यक्षमता का पता लगाया जाता है। इसमें लिवर एंजाइम, बिलीरुबिन, प्रोटीन और खून जमने की क्षमता जैसी चीजों की जांच की जाती है। वायरल हेपेटाइटिस की जांच भी की जाती है। अल्ट्रासाउंड से लिवर का आकार, बनावट और पेट में पानी की स्थिति देखी जाती है। जरूरत पड़ने पर सीटी स्कैन या एमआरआई की मदद ली जाती है। फाइब्रोस्कैन जैसी आधुनिक जांच से लिवर में कठोरता का पता लगाया जा सकता है। कुछ मामलों में बायोप्सी की जरूरत होती है, जिसमें लिवर के छोटे हिस्से की जांच की जाती है। इससे बीमारी की गंभीरता और कारण को समझने में सहायता मिलती है।

जटिलताएं

सिरोसिस के कारण कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पेट में पानी भरना सबसे सामान्य जटिलताओं में से एक है। इससे पेट भारी हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। पोर्टल हाइपरटेंशन के कारण भोजन नली की नसें फूल सकती हैं। यदि ये नसें फट जाती हैं तो अचानक खून की उल्टी हो सकती है, जो जानलेवा स्थिति बन सकती है। लिवर की कार्यक्षमता कम होने से शरीर में विषैले पदार्थ जमा होकर दिमाग को प्रभावित कर सकते हैं। इससे मरीज भ्रमित हो सकता है या उसकी मानसिक स्थिति बदल सकती है। सिरोसिस के मरीजों में लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए नियमित जांच जरूरी होती है।

उपचार

लिवर सिरोसिस का उपचार बीमारी के कारण और अवस्था के अनुसार किया जाता है। सबसे पहले उस कारण को नियंत्रित किया जाता है, जिससे लिवर को नुकसान हो रहा है। शराब से होने वाले सिरोसिस में शराब पूरी तरह बंद करना जरूरी होता है। वायरल हेपेटाइटिस में आधुनिक दवाओं से संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। फैटी लिवर में वजन कम करना, संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मरीज को पर्याप्त पोषण देना भी जरूरी होता है। बहुत अधिक कमजोरी से बचने के लिए संतुलित आहार लेना चाहिए। नमक की मात्रा कम करने की सलाह दी जा सकती है, खासकर जब शरीर में पानी जमा हो रहा हो। जटिलताओं के लिए अलग-अलग उपचार किए जाते हैं। पेट में पानी भरने पर दवाओं और अन्य प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। नसों से खून बहने की स्थिति में विशेष चिकित्सा तकनीक अपनाई जाती है। बहुत गंभीर अवस्था में लिवर प्रत्यारोपण ही अंतिम और प्रभावी विकल्प हो सकता है। इसमें खराब लिवर को हटाकर स्वस्थ लिवर लगाया जाता है।

बचाव

सिरोसिस से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी है। शराब से दूरी बनाना, वजन नियंत्रित रखना, संतुलित भोजन करना और नियमित व्यायाम करना लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। हेपेटाइटिस संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी जरूरी है। समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवहार अपनाने से खतरा कम किया जा सकता है। जो लोग लंबे समय से लिवर से जुड़ी समस्या से परेशान हैं, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए ताकि बीमारी को शुरुआती अवस्था में पहचाना जा सके।

निष्कर्ष

लिवर सिरोसिस एक गंभीर बीमारी है, लेकिन जागरूकता, समय पर जांच और सही उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। लिवर हमारे शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है और इसकी सुरक्षा के लिए जीवनशैली में सुधार आवश्यक है। बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए इसके कारणों को समझना और शुरुआती संकेतों को पहचानना बहुत जरूरी है। स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, शराब से बचाव और समय-समय पर चिकित्सा जांच लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में हो रही प्रगति से सिरोसिस के मरीजों के लिए उपचार की संभावनाएं लगातार बेहतर हो रही हैं।

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