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आयुष / Aayush

न्यूरो फिजियोथिरेपिस्ट की सलाह ऐसे पाएं पीठ दर्द से निजात

बदले हुए जीवन शैली ने पीठ दर्द, कलाइयों में दर्द,कमर में दर्द आदि तमाम व्याधियों से हमें जकड़ लिया है। इन व्याधियों से छुटकारा दिलाने का उपाय बता रही हैं डॉ. सुरभि नंदा

आयुष/एसबीएम विशेष

Dr-Surbhi Nanda,MPT Neurology

कोरोना काल में ज्यादातर लोगों को घर से ही काम करना पड़ रहा है। देखा यह जा रहा है कि कप्यूटर पर समय बिताने का वक्त भी बढ़ गया है। मोबाइल पर समय बिताने का वक्त भी ज्यादा हो गया है। तकनीक की भाषा में कहें तो हम ऑन स्क्रीन ज्यादा बैठ रहे हैं। दूसरी तरफ हम पहले जैसा व्यायाम या घर बाहर पार्क में घूमने भी नहीं जा पा रहे हैं।
ऐसे में इस बात की बहुत आशंका है कि हमारे शरीर में कई प्रकार की व्याधियां उत्पन्न हो जाए। वैसे भी स्पौंडिलाइटिस, सर्वाइकल, कमर दर्द, सर दर्द, गर्दन में दर्द, जोड़ों आदि में सूजन जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही है। यदि समय रहते इन पर ध्यान न दिया गया तो यह हमें हमारे काम करने से रोक देती हैं। इसलिए हमें कुछ सावधानियां व्यायाम और बैठने के सही आसन का ख्याल रखना होगा। न्यूरों फिजियोथैरेपी के दृष्टिकोण से यहां मैं कुछ व्यायाम और उठने बैठने के सही आसनों पर चर्चा कर रही हूं जिनका पालन करके ऐसी बहुत सी समस्याओं से बचा जा सकता है या जिन्हें है वह उसमें कमी ला सकते हैं या ठीक कर सकते हैं।
कंप्यूटर या मोबाइल के सामने लंबे समय तक बैठकर हमारी गर्दन में, हाथ में, कलाई में और कमर में दर्द हो जाता है। ऐसे में हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे:-
1-हर आधे घंटे में हमें अपने कंधों को थोड़ी देर के लिए ऊपर नीचे करना चाहिए और गोल-गोल घुमाना चाहिए क्लॉकवाइज और एन्टीक्लाकवाइस दोनों दिशाओं में। ऐसा करने से गर्दन का खिंचाव, दर्द और सूजन चला जाता है।
2- हाथ में या कलाई में अगर दर्द आता है तो कलाई को गोल-गोल घूमाइए साथ ही कलाई को ऊपर नीचे हिलाइये और किसी मुलायम रबड़ की बॉल स्माइली बॉल आदि को हल्का-हल्का दबाएं। इससे कलाई के दर्द को और हाथों के दर्द को आराम मिलता है।
3-कमर के दर्द के लिए आपको सीधा लेटना है और कमर को ऊपर की तरफ उठाना है जिसे हम ब्रिजिंग बोलते हैं।
4-इसी के साथ अगर हम आइसिंग भी करेंगे तो बहुत लाभदायक होगा। जिस भी जगह दर्द है उस जगह पर अगर बर्फ से सिकाई करें तो दर्द और सूजन में कमी आती है क्योंकि इसके कारण हमारी ब्लड वेसल फैलती और सिकुड़ती हैं, जिससे सूजन में कमी आती है। आइसिंग दिन में चार बार की जा सकती है परन्तु 2 घंटे का गैप जरूर होना चाहिए।
5-हमें अपने बैठने के आसन का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। बैठते समय हमारी कमर सीधी रहनी चाहिए। कमर के पीछे कुछ सपोर्ट होनी चाहिए और हमारे सारे जोड़ 90 डिग्री पर होने चाहिए जैसे कि चित्र में दिखाया गया है।
इन बातों का ध्यान रखने पर हम शरीर के जोड़ों से जुड़े बहुत से कष्टों को दूर सकते हैं और अपनी कार्य करने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं।

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