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भारत बनी विश्व की फार्मेसी : डॉ. मांडविया

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण व रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 1 जुलाई को आईपीसी सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में उन्होंने इंडियन फार्माकोपिया (IP) के 9वें संस्करण का विमोचन किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार भी उपस्थित थीं।

चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखें

इस अवसर पर डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा-हम जेनेरिक दवा सूत्रीकरण व निर्माण में विशेषज्ञता और विश्व को सस्ती दवा की आपूर्ति करके विश्व की फार्मेसी बन गए हैं लेकिन हमें अभी भी औषध क्षेत्र में अनुसंधान को मजबूत करने की जरूरत है। अब तक चार देशों-अफगानिस्तान, घाना, नेपाल और मॉरीशस-ने आईपी को मानकों की पुस्तक के रूप में स्वीकार किया है। हमें एक रोडमैप बनाना चाहिए और इसे आगे बढना चाहिए जिससे अधिक से अधिक देश हमारे फार्माकोपिया को स्वीकार करें। मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार की भूमिका को रेखांकित किया और कहा, ‘‘हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि स्वदेशी दवाओं में हमारी मजबूती के आधार पर हमारे फार्माकोपिया अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करके इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं। स्वास्थ्य और समृद्ध भारत विकसित करने, हमारे चिकित्सा उत्पादों-टीकों, दवाओं, उपकरणों आदि की मानक गुणवत्ता बनाए रखने और रोगियों पर इन दवाओं के प्रभाव पर नजर रखने के लिए फार्माकोपिया महत्वपूर्ण है।’’

फार्माकोपिया के बारे में

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) इंडियन फार्माकोपिया (IP) को औषध और प्रसाधन सामग्री अधिनियम-1940 की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रकाशित किया जाता है। आईपी भारत में उत्पादित या विपणन की जाने वाली औषधियों के लिए आधिकारिक मानकों को निर्धारित करता है और इस प्रकार औषधियों की गुणवत्ता के नियंत्रण व विश्वसनीयता में अपना योगदान देता है। इसका उद्देश्य हमारे देश में दवाओं के निर्माण, निरीक्षण और वितरण के लाइसेंस में सहायता करना है।

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