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जानिए इस साल पद्म सम्मान पाने वाले डॉक्टरों को

अजय वर्मा

नयी दिल्ली। पिछले कई सालों से हेडलाइन और फ्रंट पेज से दूर रहकर विषिष्ट काम करने वालों को पद्म सम्मान मिल रहा है। 2024 में भी ऐसे ही 131 गुमनाम नायकों का चयन किया गया है जिसमें दवा और उपचार के क्षेत्र के कई दिग्गज भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ताजा ‘मन की बात’ में गुमनाम नायकों की बात की है। इसमें मनोहर कृष्ण डोले और श्रीमती जी. नचियार का भी नाम शामिल है। चेन्नई के  अरविंद आई केयर सिस्टम की निदेशक डॉ. जी. नाचियार 1976 में अस्पताल की स्थापना से गरीबों और वंचितों की सेवा कर रही हैं।

जानना जरूरी है कि पद्म सम्मानित डॉक्टरों में किनका क्या योगदान है।
डॉ. अश्विन बालचंद मेहता हृदय रोग विशेषज्ञ हैं और भारत में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के अग्रदूतों में से एक हैं। वह मुंबई के जसलोक अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक हैं और सलाहकार के रूप में ब्रीच कैंडी अस्पताल में भी कार्य करते हैं। डॉ. तेजस एम. पटेल भी हृदय रोग विशेषज्ञ हैं और एपेक्स हार्ट इंस्टीट्यूट, अहमदाबाद में अध्यक्ष और मुख्य इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट हैं। भारत का सर्वाेच्च चिकित्सा पुरस्कार डॉ. बी.सी. राय अवार्ड भी इन्हें मिल चुका है।

डॉ. सी. पी. ठाकुर को कौन नहीं जानता। उन्हें कालाजार की दवा खोजने के लिए जाना जाता है। वे सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। उन्हें 1982 में पद्मश्री भी मिला था। श्रीमती प्रेमा धनराज कर्नाटक की रहने वाली हैं। बचपन में किचन में खेलते समय स्टोव फटने से वह गंभीर रूप से झुलस गई थीं। उनका चेहरा, गर्दन और शरीर लगभग 50 प्रतिशत जल गया था। एक बर्न विक्टिम होने के नाते उन्होंने जलने की त्रासदी झेलने वाली पीड़ितों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अग्नि रक्षा एनजीओ बनाकर 25 हजार बर्न पीड़ितों की मुफ़्त सर्जरी की है।
डॉ. राधा कृष्ण धीमान हेपेटिक और बिलेरी डिजीज के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उनके नाम करीब 150 से अधिक पब्लिकेशन हैं। अभी वे संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI), सहारनपुर के निदेशक है। डॉ. यजदी मानेकशा इटालिया आदिवासियों में घूम-घूमकर सिकलसेल एनीमिया का इलाज करते हैं।
वैद्यराज हेमचंद मांझी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ में पिछले 50 वर्ष से अपनी सेवा दे रहे हैं। वह पहले कोई फीस नहीं लेते थे पर अब भी नाममात्र की फीस लेते हैं। वे देसी जड़ी-बूटी और औषधि के अच्छे जानकार है। जड़ी-बूटियों से ही बड़ी संख्या में कैंसर पीड़ितों की उन्होंने जान बचाई है। नागपुर के प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. चंद्रशेखर मेश्राम पिछले 38 सालों से मानवता की सेवा कर रहे हैं।
91 साल के डॉ. राधेश्याम पारीक आगरा में होम्योपैथी से इलाज करते रहे हैं। उनका पूरा परिवार ही डॉक्टरी पेशे में है। वे मरीजों का फ्री इलाज करते हैं। उनका कहना है कि इस सम्मान से होम्योपैथी सम्मानित हुआ है। आयुर्वेदाचार्य दयाल मावजीभाई परमार गुजरात के चिकित्सक, प्रोफेसर, शिक्षक, शोधकर्ता है। उन्होंने वेदों का गुजराती अनुवाद करके इतिहास रच दिया। डॉ. चन्द्रशेखर चन्नापटना राजन्नाचार को पीपुल्स साइकेट्रिस्ट के नाम से जाना जाता है। वे कर्नाटक के एक प्रसिद्ध मनोचिकित्सक और परोपकारी हैं। घर-घर जाकर मानसिक विसंगतियों का इलाज वे करते हैं।

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