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जनऔषधि केन्द्र खोलने वालों को 15 हजार रुपये तक मासिक इंसेटिव

  • स्वस्थ भारत न्यास का सातवां स्थापना दिवस
  • स्वास्थ्य अमृत मंथन शिविर-पार्ट-2
  • जनऔषधि केन्द्रों में सालाना 30 फीसद बढ़ोत्तरी
  • अब तक 23 करोड़ पैड बेचे जनऔषधि ने
  • देश के 750 जिलों में जनऔषधि केन्द्र

नई दिल्ली/गाजियाबाद  (स्वस्थ भारत मीडिया)।  ‘जनऔषधि ने देश की गरीब जनता को सस्ती और गुणवत्तायुक्त दवाइयों का विकल्प दिया है। देश के 750 जिलों में कम से कम एक जन औषधि की दुकान है। मैं एक बात साफ करना चाहता हूँ कि जन औषधि आयुर्वेद की दवा नहीं है। यह एलोपैथिक दवा ही है। बस इसकी कीमत कंम होती है। यह सस्ती होती है लेकिन उतनी ही फायदे वाली है जितनी इसकी महंगी वर्जन वाली दवा होती है। यह भी शोध और मानवीय टेस्ट में सफल होने के बाद जारी होती है। बस सरकार और निर्माता इसका दाम कम रखते हैं क्योंकि यह जनता के भले के लिए बनाई जाती है। 350 जनऔषधि केंद्र सिर्फ दिल्ली में हैं।’ उक्त बातें प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना केमुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रवि दाधीच ने स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा आयोजित दो दिवसीय स्वास्थ्य अमृत मंथन शिविर में मुख्य वक्तव्य देते हुए कही।

जनऔषधि के चार वेयर हाउस

उन्होंने बताया कि, ‘जन औषधि की भंडारण व्यवस्था बहुत ही बेहतर है। उन्होंने कहा कि लोगों तक सस्ती दवाइयां समय तक पहुंच सके इसके लिए चार वेयर हाउस बनाएं गए हैं। दिल्ली, गुडगाँव, सूरत और गुहाटी। 38 के करीब जिला स्तर पर वितरक हैं जो नजदीकी जन औषधि केंद्र पर दवा पहुंचाने का काम करते हैं। सरकार जनता के स्वास्थ्य को लेकर सजग है। इसलिए हर साल 1000 जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं। यह योजना प्रति वर्ष 30 प्रतिशत बढ़ रही है।‘ सेवा और रोजगार के मूल मंत्र को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘जो व्यक्ति जन औषधि केंद्र खोलता है उसे सरकार 15000 रुपये तक का प्रतिमाह इंसेटिव देती है। 3 साल तक सरकार दुकानदार को सहयोग करती है। 5 लाख तक अनुदान दिया जाता है।’

पर्यावरण फ्रेंडली पैड

महिला स्वास्थ्य को बेहतर करने में जनऔषधि की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘महिलाओं के लिए महामारी संदर्भित स्वास्थ्य रक्षा को ध्यान में रखकर 1 रुपये में पैड तैयार किया गया है। 10 रुपये का एक पैक मिलता है। अब तक 23 करोड़ पैक बनाकर मार्केट में बेचा गया है। यह पैड पर्यावरण में खुद ही नष्ट हो जाते हैं। इनसे प्रदूषण नहीं फैलता है। ये बायोग्रेडिबल पैड हैं।’ जनऔषधि केन्द्र तक पहुंचने के बारे में बताते हुए उन्होंने बताया कि, ‘जनऔषधि के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए सरकार ने सुगम एप लॉन्च किया है जिसकी मदद से आम जनता अपने नजदीकी जनऔषधि केंद्र तक जा सकती है। दवा जिसकी जरूरत है, उसको भी एप पर सर्च किया जा सकता है।’

मेडिकल छात्रों को प्रेरित करना होगा

स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में जनऔषधि की भूमिका पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मेवाड़ विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. अशोक गदिया ने कहा कि, जनऔषधि के बारे में लोगों को जागरूक करने की बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री भी स्वास्थ्य और शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में देखते हैं। मेरा मानना है कि भावी युवा पीढ़ी में जो अभी डॉक्टरी पढ़ रहे बच्चे हैं, उनके ऊपर अभी कोई व्यवसायिक दबाव नहीं। उनका मन अभी साफ पाक है। उन्हें जन औषधि से परिचित कराया जाए और उनको शपथ दिलाया जाए जैसा डॉक्टर लेते हैं। सेवा के लिए वैसे ही उन्हें अपने मरीजों को जन औषधि देने के लिए प्रेरित किया जाए।” स्वस्थ भारत न्यास के सातवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय स्वास्थ्य अमृत मंथन शिविर में इस सत्र का संचालन मेवाड़ यूनिवर्सिटी के निदेशक श्री शशांक द्विवेदी ने किया।

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