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हावड़ा में गंगा किनारे के ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक हटाने का अभियान

सफलता की कहानीः स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। गंगा नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के लिए पश्चिम बंगाल में हावड़ा जिले की जिला परिषद ने स्थानीय पंचायत समितियों और जीपी समुदायों के सहयोग से गंगा से सटी 18 ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक हटाने का कार्यक्रम आयोजित किया। ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM) के माध्यम से ओडीएफ संधारणीयता और दृश्य स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (SBM-G) के चरण 2 को ध्यान में रखते हुए अप्रैल में इस पहल का आयोजन किया गया।

आमरा सुषमा जलप्रताप का रहा सहयोग

राज्य के हस्तक्षेप के अलावा हावड़ा जिला परिषद गंगा नदी से सटे सभी प्रखंडों और उसके अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों के साथ सामुदायिक सहायता संगठन- आमरा सुषमा जलप्रपात के सहयोग से पवित्र नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के लिए आगे आए हैं। इसमें जैव-विविधता की बहाली, मछली, सरीसृप, डॉल्फिन और अन्य जानवरों को सुरक्षित और संरक्षित किया जाता है। पानी के भीतर जलीय इकोसिस्टम और जैव-विविधता का संरक्षण, गंगा की स्वच्छता आदि इसके उद्येष्य हैं।

योजना के प्रमुख कार्य

इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयास में हावड़ा में गंगा से सटे 3 प्रखंडों के 18 गांवों में कई कार्य हुए। ये तीन प्रखंड हैं: संकरैल, उलुबेरिया और शामपुर। इसके लिए 18 ग्राम पंचायतों में ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन, 5482 एसएचजी सदस्यों के साथ 180 बैठकें, स्थायी प्रकृति के 36 प्लास्टिक संग्रह बक्से की स्थापना, सार्वजनिक स्थानों पर 54 स्थायी डिस्प्ले बोर्ड की स्थापना, गंगा से सटे गांवों में 18 दिनों में 9.32 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा एकत्रित करना आदि कार्य हुए।

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