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हैदराबाद में मानव रहित वाहनों के लिए अत्याधुनिक केंद्र स्थापित

नयी दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी डॉ. जितेंद्र सिंह ने हैदराबाद में मानवरहित वाहनों के विकास के लिए अत्याधुनिक सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया है। यह एक स्वचालित नेविगेशन सुविधा केंद्र है जिसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), हैदराबाद परिसर में स्थापित किया गया है। टेक्नॉलॉजी इनोवेशन हब ऑन ऑटोनोमस नेविगेशन (TiHAN) नामक यह केंद्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 130 करोड़ रुपये के अनुदान पर आधारित है।

स्मार्ट मोबिलिटी क्षेत्र में सिरमौर बनेंगे

यह एक बहु-विषयक पहल है जो भारत को भविष्य और अगली पीढ़ी की ‘स्मार्ट मोबिलिटी’ तकनीक में एक वैश्विक खिलाड़ी बनाने की क्षमता रखती है। अपनी तरह के इस पहले अत्याधुनिक सुविधा केंद्र में मानव रहित हवाई एवं स्थलीय वाहन विकसित किये जाएंगे। डॉ. सिंह ने बताया कि दुनिया भर में नियंत्रित वातावरण में मानव रहित और इनसे जुड़े वाहनों के संचालन की जांच के लिए सीमित टेस्टबेड या प्रोविंग ग्राउंड (जहाँ परीक्षण होता है) मौजूद हैं। इसमें वास्तविक जीवन के यातायात संचालन में होने वाले विभिन्न परिदृश्यों का अनुकरण किया जाता है। ब्रिटेन में मिलब्रुक प्रोविंग ग्राउंड, अमेरिका में एम सिटी, सिंगापुर में सेट्रान, दक्षिण कोरिया में के सिटी, जापान में जरी आदि उदाहरण के तौर पर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत में स्वचालित वाहनों का आकलन करने के लिए वर्तमान में ऐसी कोई टेस्टबेड सुविधा नहीं है। इसीलिए इस टेक्नॉलॉजी इनोवेशन हब ऑन ऑटोनोमस नेविगेशन (TiHAN) टेस्टबेड की आवश्यकता है।

सुविधाओं से लैस टेस्ट बेड

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ श्रीवरी चंद्रशेखर ने बताया कि इस परीक्षण सुविधा में एक हवाई पट्टी, सॉफ्ट लैंडिंग क्षेत्र, ड्रोन रखने के लिए जगह (हैंगर), एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (GCS), प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए टेलीमेट्री स्टेशन शामिल है।  LIDAR, रडार, कैमरा आदि जैसे पेलोड के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा रहा है। मैनुअल और स्वायत्त संचालन के बीच नियंत्रण संक्रमण और चालक रहित वाहनों की सार्वजनिक स्वीकृति पर अध्ययन किया जा रहा है। भारतीय परिदृश्य में विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए नियमों और संचालन नीतियों को तैयार करने में मानव रहित वाहनों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण सहायता करेंगी।

इंडिया साइंस वायर से साभार

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