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आत्मनिर्भर भारत अभियान: लोकल से वोकल तक

आत्मनिर्भर भारत

पीएम मोदी ने चुनौती को अवसर में बदलने की राह सुझाया है। भारतीयों को आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प कराया है। लोकल से वोकल का मंत्र दिया। इसी विषय को रेखांकित कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व सांसद आर.के.सिन्हा

 एसबीएम विशेष

आर.के. सिन्हा, वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार एवं पूर्व सांसद

मंगलवार की शाम प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में बहुत ही प्रेरक और दिलचस्प बातें कहीं। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी चुनौती है। लड़ाई लम्बी चलेगी तो अब लॉकडाउन-4यानि18मई के बाद होने वाले तालाबंदी का स्वरूप भी अलग होगा। कहने का अर्थ यह था कि अब हम सावधानी के साथ अपने काम पर लौटेंगे। लेकिन, लापरवाहियां भी बर्दाश्त नहीं की जायेगी। प्रधानमंत्री ने यह कहा कि इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिए “आत्मनिर्भर भारत अभियान”  की शुरूआत की जा रही है।

इस योजना की शुरूआत के लिए एक बड़े भारी भरकम आर्थिक पैकेज की घोषणा की जा रही है जो 20लाख करोड़ रूपये का है।20 लाख करोड़ रूपया। इसका अर्थ यह हुआ कि लगभग 130करोड़ प्रत्येक भारतीय नागरिकों के ऊपर यह20लाख करोड़ रूपया का पैकेज लगभग प्रत्येक नागरिक पर 15,384रूपये का बैठेगा। इतना बड़ा आर्थिक पैकेज आज तक देश में कभी भी किसी भी प्रधानमंत्री ने देने के बारे में सोचा तक नहीं होगा। इसका कारण क्या था। कारण बहुत सीधा था कि इस देश में जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं उसमें से दो ही ऐसे प्रधानमंत्री हुए हैं जो जमीनी प्रधानमंत्री थे। जिन्होंने गरीबी देखी थी,भूख देखा था और मजबूरियों से संघर्ष करते हुए ऊपर उठ कर आगे बढ़े थे। पहले तो थे स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी और दूसरे हैं नरेन्द्र मोदी जी। बाकि तो सारे प्रधानमंत्री पैदा ही हुए ऐसे खानदानों में जिसने कभी गरीबी और भूख को देखा ही नहीं था। इसलिए प्रधानमंत्री ने कल के अपने भाषण में सिर्फ किसान,मजदूर,छोटे उद्योगपति इतने तक ही की चर्चा नहीं की।

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आज तक इस देश में तमाम राजनीतिक दल भी किसान,मजदूर और पूंजीपति की ही चर्चा करते आये थे।लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी ने रेहड़ी वाले,ठेले वाले,पशु पालकों,सब्जी उगाने वाले,कामगारों और उद्योगपतियों की भी चर्चा की। सभी लोगों के लिए यह20लाख करोड़ का पैकेज है, जिसका पूर्ण विवरण तो वित्त मंत्री घोषित करेंगीं। किन्तु,यह बहुत बड़ा पैकेज है इसमें देश की आर्थिक उन्नति का बहुत बड़ा रास्ता खुलेगा। लेकिन,प्रधानमंत्री ने दो-तीन उदाहरणों को देकर अपनी बातों को बताने की कोशिश की कि वे क्यों समझते हैं कि हम इस चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं।

सबसे पहली बात तो प्रधानमंत्री ने यह बताया कि दृढ़ संकल्प शक्ति के साथ यदि कोई भी काम किया जाये तो सफलता सुनिश्चित होती है। उन्होंने बताया कि जिस दिन देश में तालाबंदी शुरू किया गया उस दिन भारत में एक भी पीपीई नहीं बनता था और एन 95 फेश मॉस्क भी इक्के दुक्के लोग ही बनाते थे। यह भी थोड़ी मात्रा में ही। आज की स्थिति यह है कि आज भारत इन दोनों उत्पादों को बनाने के मामले में न केवल सक्षम हो गया है, बल्कि निर्यात करने के लिए भी तैयार खड़ा है। आज देश में प्रति दिन 2 लाख पीपीई और 2 लाख एन 95 ग्रेड के फेश मॉस्क बनने शुरू हो गये हैं।

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दूसरा उदाहरण प्रधानमंत्री ने गुजरात के भुज का दिया। 2002 में भुज  पूरी तरह विध्वंस  हो गया था। ऐसा भूकम्प, इतनी जानमाल की क्षति जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। चूँकि, उन दिनों मैं स्वयं कई संस्थानों के साथ जुड़ा हुआ था जो भुज के राहत कार्य से जुड़े थे, मैं बराबर भुज जाया करता था। जो भुज की स्थिति थी वह बहुत ही भयानक थी। वहां कुछ बचा ही नहीं था। आज आप जामनगर चले जायें। भुज के किसी भी क्षेत्र में चले जाये जो भूकंप प्रभावित था, तो उससे अच्छा व्यवस्थित गांव, कस्बा और शहर आपको देश में कहीं देखने को नहीं मिलेगा। आज भुज सर्वांगीण प्रगति कर रहा है। पूरा कच्छ क्षेत्र ही प्रगति कर रहा है। वहां चुनौती को अवसर में बदला गया है। इसलिए यदि प्रधानमंत्री ने ये उदाहरण दिये तो उसके पीछे बहुत ही मजबूत कारण हैं। प्रधामनंत्री ने एक और अच्छी बात कही है।

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उन्होंने कहा कि इस महान संकट में हमारी लोकल सप्लाई चेन जो थी हमारे स्थानीय छोटे-मोटे कारोबारी जो थे, उन्होंने ही हमारी जिंदगी की रक्षा की। उन्होंने ही हमें अन्न पहुंचाये, फल पहुंचाया, सब्जी, दूध एवं अन्य सामग्री भी। इसलिए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें ‘लोकल पर भोकल होना होगा।’ यानि हमें सिर्फ बड़े-बड़े अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडों की पैरवीकार बनने के बजाय स्थानीय निर्माता और स्थानीय उत्पादक, स्थानीय आपूर्ति कर्ता पर ही ज्यादा विश्वास करना होगा। उनका सम्मान करना होगा। उनके लिए ढ़िढोरा पीटकर यह कहना पड़ेगा कि ये भी किसी भी अंतर्राष्ट्रीय उत्पादक या आपूर्तिकर्ताओं से कमजोर नहीं है।

यह एक बहुत बड़ी बात है। क्योंकि, हर कोई जो आज एक बहुत बड़ा ब्रांड बनकर उभरा हुआ है एक दिन उसकी भी शुरूआत तो एक छोटे से रूप में ही हुई थी। लेकिन, उनके देशों ने उनका अपने “लोकल” पर “वोकल” होकर उन ब्रांडो का प्रचार किया और वे विश्व में वे फैल गये तो हम अपने ब्रांडों के लिये यही क्यों नहीं कर सकते हैं। अतः अब हम सभी मिलकर देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़े। भविष्य हमारा है। 21वीं सदी भारत की है और भारत विश्व का नेतृत्व करने के लिए उठ खड़ा हुआ है।

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मैं अक्सर अपने लेखों में इस बात की जिक्र करता ही रहता हूँ कि चुनौती और अवसर एक दुधारी तलवार की तरह है। जहां कहीं भी आपके सामने चुनौतियां खड़ी होंगी उसमें बहुत बड़ा अवसर भी छिपा मिलेगा, जिसे यदि ढूंढ़ कर निकाल लें और उपयोग कर लें तो चुनौती को अवसर में बदलने में कोई वक्त नहीं लगेगा। इसी प्रकार जहां कहीं भी अवसर आता है तो उसमें भी कुछ चुनौतियां भी छिपी होती है। जैसे कि आधुनिक तकनीक के रूप में एक बहुत बड़ा अवसर आया है पूरे विश्व में। लेकिन,आधुनिक तकनीक के कारण तरह-तरह के साइबर क्राइम बढ़े हैं। अतः अवसर के साथ चुनौती भी है।

 

 

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