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यहां पढ़ें पीएम मोदी के 12 योग-सूत्र

हृदय संबंधी रोगों की रोकथाम में योग कारगर: पीएम

अंतिम जन तक योग पहुंचाना चाहते हैं मोदी

प्रीवेंटिव हेल्थ की दिशा में योग की भूमिका महत्वपूर्ण

रांची के प्रभात तारा मैदान में मना पांचवा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

योग सिर्फ तभी नहीं होता  जब हम आधा घंटा जमीन या मेज पर, या दरी पर होते हैं; योग अनुशासन है, समर्पण है, और इसका पालन पूरे जीवनभर करना होता है। योग-आयु, रंग, जाति, सम्‍प्रदाय, मत, पंथ, अमीरी, गरीबी, प्रांत, सरहद के भेद, सीमा के भेद, इन सबसे परे है। योग सबका है और सब योग के हैं:-पीएम नरेद्र मोदी के शब्द

नई दिल्ली/22.06.19

आशुतोष कुमार सिंह

रांची के प्रभात तारा मैदान में आयोजित पांचवा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम ने कहा कि, ‘आज ये प्रभात तारा मैदान विश्‍व के नक्‍शे पर जरूर चमक रहा है। ये गौरव आज झारखंड को मिला है।’

मोदी ने की मीडिया की सराहना

अपने शुरूआती संबोधन में एक ओर जहां देश-दुनिया के लोगों को योग दिवस मनाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया वहीं इसके प्रसार में मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘योग के दुनियाभर में प्रसार में मीडिया के हमारे साथी, सोशल मीडिया से जुड़े लोग जिस तरह की अहम भूमिका निभा रहे हैं, वो भी बहुत महत्‍वपूर्ण है, मैं उनका भी आभार व्‍यक्‍त करता हूँ।’

पीएम मोदी ने झारखंड में योग दिवस मनाने के तीन कारण गिनाए

झारखंड में योग दिवस मनाने के अपने फैसले के बारे में बताते हुए पीएम ने कहा कि, ‘झारखंड में योग दिवस के लिए आना अपने-आप में बहुत सुखद अनुभव है। आप लोग बहुत सुबह ही अपने घरों से निकलकर दूर-दूर से यहां आए हैं, मैं आप सभी का आभारी हूं। बहुत से लोगों के मन में आज ये सवाल है कि मैं पांचवां योग दिवस मनाने के लिए आज आपके साथ योग करने के लिए रांची ही क्‍यों आया हूँ। भाइयो और बहनों, रांची से मेरा लगाव तो है ही, लेकिन आज मेरे लिए रांची आने की तीन और बड़ी वजह हैं। पहला- जैसा कि झारखंड के नाम में ही ये वन प्रदेश है, प्रकृति के बहुत करीब है और योग और प्रकृति का तालमेल इंसान को एक अलग ही एहसास कराता है। दूसरी बड़ी वजह यहां आने की वजह ये थी कि रांची और स्‍वास्‍थ्‍य का रिश्‍ता अब इतिहास में दर्ज है। पिछले साल 23 सितम्‍बर को पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय की जन्‍म-जयंती नि‍मित्‍त यहां रांची से ही हमने आयुष्‍मान भारत योजना की शुरूआत की थी। आज दुनिया की सबसे बड़ी Health Care Scheme, प्रधानमंत्री जन-आरोग्‍य योजना बहुत कम समय में गरीबों के लिए बहुत बड़ा संबल बनी है। भारतीयों को आयुष्‍मान बनाने में योग का जो महत्‍व है, उसे भी हम भली-भाँति जानते हैं, समझते हैं; इसलिए भी आज रांची आना मेरे लिए विशेष है। भाइयो और बहनों, अब योग के अभियान को मुझे और हम सबको मिल करके एक अलग स्‍तर पर ले जाना है और यही राँची आने की मेरी तीसरी और सबसे बड़ी वजह वो भी है।’

योग से गरीबों को जोड़ने की वकालत

योग की भारतीय परंपरा एवं गरीबों को योग से जोड़ने के लिए अपनी सरकार की कृतसंकल्पता को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि,‘योग हमारे देश में हमेशा से रहा है, हमारी संस्‍कृति का अभिन्‍न हिस्‍सा रहा है। यहां झारखंड में भी जो ‘छऊ नृत्‍य’ होता है, उसमें आसनों और मुद्राओं को व्‍यक्‍त किया जाता है। लेकिन ये भी सच हे कि आधुनिक योग की जो यात्रा है, वो देश के ग्रामीण और आदिवासी अंचल में अभी उस तरह नहीं पहुंची है, जैसी पहुंचनी चाहिए थी। अब मुझे और हम सब को मिल करके आधुनिक योग की यात्रा शहरों से गांवों की तरफ, जंगलों की तरफ, दूर-सुदूर आखिरी इंसान तक ले जानी है। गरीब और आदिवासी के घर तक योग को पहुंचाना है। मुझे योग को गरीब और आदिवासी के जीवन का भी अभिन्‍न हिस्‍सा बनाना है क्‍योंकि ये गरीब ही है जो बीमारी की वजह से सबसे ज्‍यादा कष्‍ट पाता है। ये बीमारी है जो गरीब को और गरीब बना देती है। इसलिए ऐसे समय में जब देश में गरीबी कम होने की रफ्तार बढ़ी है, योग उन लोगों के लिए भी एक बड़ा माध्‍यम है जो गरीबी से बाहर निकल रहे हैं। उनके जीवन में योग की स्‍थापना का मतलब है उन्‍हें बीमारी और गरीबी के चंगुल से बचाना।’

पीएम ने वेलनेस के लिए योग के महत्व को किया रेखांकित

इलनेस से वेलनेस की ओर ले जाने में योग के महत्व के रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘सिर्फ सुविधाओं से जीवन आसान बनाना काफी नहीं है। दवाइयां और सर्जरी का ही समाधान पर्याप्‍त नहीं है। आज के बदलते हुए समय में illness से बचाव के साथ-साथ wellness पर हमारा अधिक फोकस होना जरूरी है। यही शक्ति हमें योग से मिलती है। यही भावना योग की है, पुरातन भारतीय दर्शन की भी है। योग सिर्फ तभी नहीं होता  जब हम आधा घंटा जमीन या मेज पर, या दरी पर होते हैं; योग अनुशासन है, समर्पण है, और इसका पालन पूरे जीवनभर करना होता है। योग-आयु, रंग, जाति, सम्‍प्रदाय, मत, पंथ, अमीरी, गरीबी, प्रांत, सरहद के भेद, सीमा के भेद, इन सबसे परे है। योग सबका है और सब योग के हैं।’

प्रीवेंटिव हेल्थ केयर का मजबूत स्तंभ है योग

प्रीवेंटिव हेल्थ की दिशा में योग के महत्व को रेखांकित करते हुए पीएम ने कहा कि, ‘बीते पांच वर्षों में योग को Health और Wellness के साथ जोड़कर हमारी सरकार ने इसे Preventive Health Care का मजबूत स्‍तंभ बनाने का प्रयास किया है। आज हम ये कह सकते हैं कि भारत में योग के प्रति जागरूकता हर कोने तक, हर वर्ग तक पहुंची है- ड्राइंगरूम से बोर्डरूम तक, शहरों के parks से लेकर sports complex तक, गली-कूचों से wellness centre तक; आज चारों तरफ योग को अनुभव किया जा सकता है।’

योग के प्रति युवाओं में बढ़ते आकर्षण से खुश हैं पीएम

योग के प्रति युवाओं में बढ़ रहे आकर्षण को देखकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए पीएम ने कहा कि, मुझे उस समय संतोष मिलता है, जब मैं देखता हूं कि युवा पीढ़ी हमारी इस पुरातन पद्धति को आधुनिकता के साथ जोड़ रही है, प्रचारित और प्रसारित कर रही है। युवाओं के innovative और creative ideas से योग पहले से कहीं अधिक लोकप्रिय हो गया है, जीवंत हो गया है।

पीएम अवार्ड से सम्मानित लोगों की पीएम ने की तारीफ

योगा को बढावा देने की दिशा में किए गए कार्यों के लिए दिए जाने वाले पीएम अवार्ड की को प्राप्त करने वालों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘आज के इस अवसर पर Prime Minister’s Award for Promotion & Development of Yoga, उसकी घोषणा की गई, हमारे मंत्री श्री ने की। एक ज्‍यूरी ने इसको निर्णय किया है और पूरी दुनिया में मशक्‍कत करके इन लोगों को खोजा गया है। जिन साथियों को ये पुरस्‍कार मिला है, मैं उनकी तपस्‍या और योग के प्रति उनके समर्पण की सराहना करता हूँ।’

हर्ट केयर की दिशा में काम करने पर दिया बल

इस वर्ष के योग दिवस के मुख्य थीम या ध्येय वाक्य को रेखांकित करते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा कि, ‘इस वर्ष के अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस का विषय है ‘Yoga for Heart Care’। Heart Care  आज पूरे विश्‍व के लिए एक चुनौती बन चुका है। भारत में तो बीते दो-ढाई दशकों में Heart से जुड़ी बीमारियों में कई गुना बढ़ोत्‍तरी हुई है। दुखद बात ये है कि बहुत ही कम उम्र के युवाओं में भी heart की समस्‍या अब बढ़ रही है। ऐसे में Heart care awareness के साथ-साथ योग को भी Prevention or treatment का हिस्‍सा बनाना जरूरी है।’

योग-आश्रमों से पीएम की अपील

योग के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने स्थानीय योग आश्रमों से आगे आने के लिए आग्रह किया और कहा कि, ‘देवघर का रिख्‍या पीठयोग आश्रम हो, रांची का योगदा सत्‍संग सखा मठ या अन्‍य संस्‍थान; वो भी इस वर्ष Heart care awareness को theme  बनाकर आयोजन करें।’

उत्तम स्वास्थ्य के लिए पीएम ने दिए चार की थ्यूरी

बेहतर स्वास्थ्य के लिए चार ‘प’ का सिद्धांत देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, ‘जब उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य होता है तो जीवन की नई ऊंचाइयों को पाने का एक जज्‍बा भी होता है। थके हुए शरीर से, टूटे हुए मन से, न सपने सजाए जा सकते हैं, न अरमानों को साकार किया जा सकता है। जब हम उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य की बात करते हैं, कुछ बातें पानी, पोषण, पर्यावरण, परिश्रम- ये चार चीजें- पीने का शुद्ध पानी मिले, आवश्‍यकता के अनुसार पोषण प्राप्‍त हो, पर्यावरण की स्‍वच्‍छ मिले और परिश्रम जीवन का हिस्‍सा हो- तो उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ये चार ‘प’ परिणाम देते हैं।’

योग के प्रसार हेतु मानव संसाधन बढाने पर पीएम का जोर

योग को घर-घर पहुंचाने के लिए मानव संसाधन को बढाने पर जोर देते हुए पीएम ने कहा कि, ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरूआत के बाद हमने अनेक प्रभावी कदम उठाए, जिनका लाभ भी देखने को मिल रहा है। भविष्‍य को देखते हुए हमें योग को हर व्‍यक्ति के जीवन का हिस्‍सा बनाने के लिए, स्‍वभाव बनाने के लिए निरंतर काम करना है। इसके लिए योग से जुड़े साधकों, शिक्षकों और संगठनों की भूमिका बढ़ने वाली है। योग को करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्‍सा बनाने के लिए manpower  को तैयार करना भी, human resource development भी बहुत जरूरी है। ये तभी संभव है जब हम योग से जुड़े standards और institutions को विकसित करें। और इसलिए हमारी सरकार इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है।’

पीएम बोले योग के क्षेत्र में शोध हो

योग के क्षेत्र में रिसर्च किए जाने की जरूरत को रेखांकित करते हुए पीएम ने कहा कि, ‘आज हमारे योग को दुनिया अपना रही है तो हमें योग से जुड़ी रिसर्च पर भी जोर देना होगा। जैसे हमारे फोन का software लगातार update होता रहता है, वैसे ही हमें योग के बारे में जानकारी दुनिया को देते रहना है। इसके लिए जरूरी है कि हम योग को किसी दायरे में बांधकर न रखें। योग को medical, physiotherapy, artificial intelligence,; इनसे भी जोड़ना होगा। इतना ही नहीं, हमें योग से जुड़ी private enterprise spirit को भी प्रोत्‍साहित करना पड़ेगा, तभी हम योग का विस्‍तार कर पाएंगे। हमारी सरकार इन आवश्‍यकताओं को समझते हुए अनेक क्षेत्रों में काम कर रही है।’

उपरोक्त 12 प्रमुख बिन्दुओं की पीएम ने अपने संबोधन में चर्चा की। इसे पीएम मोदी के 12 योग-सूत्र भी कहा जा सकता हैं।

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